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  • केदारनाथ घाटी तबाह, पचास के मरने की आशंका 
  • चार धाम यात्रा रुकी, जगह जगह 50 हज़ार से ज्यादा यात्री फंसे 
  • देहरादून में टूटे बारिश के 80 साल पुराने रिकॉर्ड 
  • आईटीबीपी और सेना के जवान राहत बचाव कार्य में जुटे 
  • केदारनाथ का मंदिर परिसर भी बर्बाद 
  • केंद्र ने सेना को लगाया, वायुसेना के हेलीकॉप्टर 
  • गढ़वाल के कई गांवों का संपर्क कटा, लोग मुश्किल में 
युवा ज़िंदगी
पहला चुंबन और पहला प्यार

शालिनी जोशी,बीबीसी

पहला चुंबन और पहला प्यार- भूटान नरेश जिग्मे वॉंग्चुक ने दून स्कूल के छात्रों को संबोधित करते हुए यही कहा कि, “आप में से कई लोगों की चाहत अभी यही होगी पहला चुंबन और पहली प्रेमिका....जरूर...होनी भी चाहिये... जीवन को भरपूर जीयें और उसके हर पल को और उसके हर पहलू का आनंद ले.”
भूटान के युवा नरेश जिग्मे वॉंग्चुक ने जब मशहूर दून स्कूल के सभागार में ये कहा तो पूरा हॉल तालियों की गडगडाहट से गूंज उठा.उन्होंने कहा कि, “पढाई के साथ-साथ प्रकति से भी प्रेम करें और समाज के सरोकारों से जुडे ताकि 50 और 60 साल की उम्र में आप जब पीछे मुडकर देखें तो संतोष हो कि आपने एक सार्थक जीवन जीया.”

मशहूर दून स्कूल के प्लैटिनम जुबली समारोह में जिग्मे वॉंगचुक बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए.इस अवसर पर मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि, “दून स्कूल को लडकियों को भी दाखिला देना चाहिये.मैं जिस भी शिक्षण संस्थान में जाती हूं देखती हूं कि छात्राएं छात्रों से ज्यादा अच्छा करती हैं.फिर दून स्कूल में उन्हें क्यों न प्रवेश मिले.”

शिक्षा के अधिकार के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा को भी सार्वभौम अधिकार बनाया जाना चाहिये. दून स्कूल में 75 साल के इतिहास में गौरव करने लायक बहुत कुछ है लेकिन गौरवमयी परंपरा का हिस्सा छात्राएं क्यों नहीं बन सकती. यानी लड़कियों को दून स्कूल में दाखिला क्यों नहीं मिलता.

दरअसल ये सुझाव और सवाल उठाया उत्तराखंड की राज्यपाल मार्ग्रेट अल्वा ने. इस चुनौतीपूर्ण प्रस्ताव से एकबारगी दून स्कूल के हेडमास्टर भी हैरान से रह गए. स्कूल प्रबंधन ने राष्ट्रपति और राज्यपाल के प्रस्ताव को सम्मान करते हुए कहा कि इस पर गौर किया जाएगा. स्कूल के हेडमास्टर पीटर मैकलॉलिन ने कुछ हैरानी और कुछ चुटकी में कहा कि कल से ही इसपर काम शुरू हो जाएगा.

दून स्कूल की स्थापना 1935 में एस के दास की पहल पर हुई थी.स्कूल के पहले बैच के कुछ छात्र भी यहां हंसी मजाक के अंदाज में अपने पुराने दिनों को याद करते नजर आए.इसी बैच के एक छात्र महेश चंद शर्मा जो देहरादून के जिलाधिकारी भी रहे,शायराना अंदाज में उनका कहना था,”कब निकल गई उम्र पता ही नहीं चला उसी को ढूढ रहे हैं कमर झुकाए हुए.”

दून स्कूल के इस खास मौके पर देश-विदेश के 5000 से ज्यादा लोग देहरादून आए हैं.इनमें प्रमुख हैं कपिल सिब्बल,कमलनाथ,विक्रम सेठ,रामचंद्र गुहा,अश्विनी कुमार और नंदन नीलकेणी

शालिनी जोशी,बीबीसी हिंदी से साभार



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