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मुख्य मुद्दा
फिर चौंकाते प्रभात डबराल
Posted on: 2010-10-18

उत्तराखंड में सूचना आयोग में जो नए बदलाव हुए हैं उनमें एक नाम वरिष्ठ पत्रकार प्रभात डबराल का है. वो सूचना आयुक्त होंगे. उनके साथ अनिल शर्मा भी इसी पद पर होंगे जो क़ानून की दुनिया के जानकार हैं.

मुख्य सूचना आयुक्त एन एस नपल्च्याल होंगे. प्रभात डबराल का नाम बताया जाता है कि लंबे समय से चर्चा में था. लेकिन उनको नज़दीक से जानने वाले कई लोग ऐसे भी थे जिन्हें इस बात की कानोंकान ख़बर नहीं थी वो ऐसा कोई फ़ैसला करने वाले हैं. उनका ये फ़ैसला इसीलिए एक नज़र में जितना आश्चर्य जगाता है उतना ही इस महत्व को भी रेखांकित करता है कि उत्तराखंड लौटकर सूचना में अहम ज़िम्मेदारी निभाने का काम प्रभात डबराल ने किसी दीर्घ चिंतन के बाद स्वीकार किया होगा.

क्षेत्रीय चैनलों के विकास और उन्हें एक विराट उपस्थिति के साथ पेश करने का श्रेय डबराल को जाता है. इस लिहाज़ से वो मास मीडिया के एक ऐसे विलक्षण प्रतिनिधि रहे हैं जिसके पास क्षेत्रीय और स्थानीय अस्मिता के उभार को समझने की तीक्ष्ण दृष्टि थी. उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे इलाक़ों में जो कुछ चुनिंदा वजहों से ही देश के नक्शे पर जगह बना पाते थे वे अब टीवी के ज़रिए अपनी अखिल भारतीय मौजूदगी दर्ज करा पाने में सफल रहे हैं. वे भी अब घटना प्रदेश बने हैं.

ये वे इलाके थे जिन्हें सांस्कृतिक सजधज और पारंपरिक रोमान प्रतीकों के तौर पर देश की मुख्यधारा में सजावटी सामान की तरह पेश किया जाता रहा था. जनांदोलनों और इन समाजों की स्थानीय अंगड़ाइयों, हलचलों और बीहड़ घटनाओं ने इस रोमान को तोड़ने की कोशिश की. और इन जनांदोलनों के लिए राजनीति से इतर समाज और मीडिया में एक गलियारा बना देने वालों में प्रभात डबराल का नाम अग्रणी लोगों में शामिल है. वो क्षेत्रीय टीवी चैनलों की सामर्थ्य को समझने वाले पहले टीवी पत्रकार बने.

उस सामर्थ्य का सर्वोत्तम इस्तेमाल करने वाले पहले पत्रकार भी वही हैं. दशरथ मांझी ने झारखंड के पास एक पहाड़ तोड़कर कहा था कि उन्हें कभी नहीं लगा कि कोई पहाड़ किसी मनुष्य से ऊंचा हो सकता है. अलग संदर्भ में कही गई ये बात उस जीवट और दुधुर्ष ऊर्जा की गवाह है जो एक असंभव से दिखते किसी काम को पूरा करने के विरल ख़्वाब में बहती रहती है. ऐसे समय में जब उदारवादी बाज़ार संस्कृति अपने स्तर पर ही सब कुछ निर्मित और पेश कर रही है उन आवाज़ों के लिए ज़ाहिर है जगह सिकुड़ती जा रही है जो भारत जैसे देश के किनारों में रहने वालों की आवाज़ें हैं. वे हाशिए के लोग हैं.

शहर कस्बे और गांव तक खिंचे हुए इन हाशियों को एक समांतर सक्रिय दुनिया और एक रचनात्मक मुख्यधारा बना देने का काम ज़ाहिर है कठिन है लेकिन मास मीडिया जैसे उपादानों के ज़रिए ये काम संभव किंचित संभव हो पाया है. प्रभात डबराल के अनुभव बताते हैं कि उन्होंने ये काम एक बड़ी हद तक किया है. और टीवी के पर्दे पर एक साधारण व्यक्ति, एक आम इंसान की आम ज़िंदगी के लिए सम्मानजनक स्पेस मुहैया कराई है. यही उनकी असाधारणता है.

उनके चाहने वालों को उम्मीद है कि उत्तराखंड में सूचना आयुक्त के रूप में जब वो एक अलग किस्म की, विकट और अफ़सरशाही और राजनीति से कहीं न कहीं भिड़ती टकराती हुई पारी शुरू करेंगे तो वो अपनी इसी असाधारणता के साथ करेंगे. प्रभात डबराल अपने करियर में कई बार बहुत चौंकाने वाली स्थितियों में आते रहे हैं. उनसे नाराज़ रहने वाले भी उनसे प्रभावित रहते आए हैं. उनके मुरीदों की संख्या अपार है उनसे ईर्ष्या करने वाले भी कम न होंगे.

सूचना आयुक्त के रूप में उनके उत्तराखंड लौट आने की मीडिया जगत में अलग अलग व्याख्याएं जारी हैं. ऐसा पहले भी उनके साथ हो चुका है. टीवी की भाषा में ही कहें तो इंतज़ार करें और प्रभात डबराल का ये “टच एंड गो” देंखें. ये चैलेंज का “टच” है और अभियान का “गो” है.

-शिवप्रसाद जोशी

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Comments

tanmay mamgain2010-10-18 06:32 AM
हम लोगों के लिए ये खबर चौंकाने वाली थी अब जब कि कुछ बेहतर होने कि उम्मीद बहुत ज्यादा नहीं रहती तब डबराल जी का आना कुछ अलग है उत्तराखंड के वो तमाम लोग जिनकी चर्चा या जिन्हें दे
ambujsharma2010-10-18 07:18 AM
राज्य गठन के बाद से लेकर आज तक कागजों के अंदर इस देव भूमि का जो भी तथाकथित विकास दोनों राष्ट्रीय दलों से जुड़े हमारे सूरमाओं ने कर डाला उसे जनता के सामने लाना बेहद जरुरी है ! तभ
mukesh nautiyal2010-10-18 07:31 AM
HIS ARRIVAL IN HILL STATE IS GIVING US A UNIQUE HILLY TOUCH. HE WILL BE A SIMBOL OF NEW PRABHAT-WE HOPE SO.
munish2010-10-18 10:12 PM
Itz a welcome development. During Kargil days i met him in a hotel Siachen and mistook him for Manglesh Dabral. I was a kid then ,but now as a mature person i am fairly convinced that this man is the correct choice for UK state of my country.
वेद भदोल2010-10-19 12:20 AM
वाकई, ये कुछ ज्यादा ही हो गया...!!! जनाब, अब तो राज्य ही अपना है. लिहाजा हमारे बीच के ही लोग वहां जायंगे, जहाँ का आप जिक्र कर रहे हैं. रही बात प्रभात भाई की तो उन्होने कोई असाधारण काम नì
MANJEET NEGI2010-10-19 02:57 AM
Prabhat ji ka koi jawab nahi hai. iss nai pari me bhi wo naya itihas likhenge.
media karmi2010-10-19 05:30 AM
जोशी जी आप प्रभात जी के चुनिन्दा लोगों में हैं ..कुछ समय पहले आपको प्रभात जी ने साधना उत्तराखण्ड का हेड बनया था क्या आप इसलिए इतनी तारीफ़ कर रहे हैं ...........अब आपको भी तो नयी पारी शुर
mukesh pant2010-10-19 12:38 PM
prabhat je ko badhiyan
well wisher2010-11-21 08:58 AM
शिव जी के की-बोर्ड से ये प्रभात डबराल की चरण वंदना कुछ जमी नहीं साहब। आप अच्छे लिख्वारों में माने जाते रहे हैं...। लेकिन अच्छे लिख्वार का मतलब ये नहीं है कि आप सब अच्छा-अच्छा ही
pradeep2010-11-26 01:53 AM
rajya soochna aayog main prabhaat dabraal ka aana tabhi sarthak mana jana chahiye jb ki wo rajya hit main R.T.I. ko ek mazboot hathiyaar maanne wale logon ka khule taur pr samarthan karenge...ek patrakaar se itni ummeed tou ki he jaa sakti hai....

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हिलवाणी, उत्तराखंड और पहाड़ों को देखने, जानने और समझने का सीधा और सरल ज़रिया. हिलवाणी आपकी वेबसाइट है. हिलवाणी से आप भी जुड़ें. अगर आपके पास है कोई दिलचस्प समाचार,विचार या फ़ोटो तो हमें भेजें. ईमेल करें shiv@hillwani.com या shalinidun@gmail.com पर.

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हिलवाणी के लिये बधाई.पहाड़ के लोगों को अपनी धरती से प्यार है.मुझे इससे काफी आशाएं हैं.
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हिलवाणी अच्छा है। इसे विकसित किया जाए तो बड़े काम का साइट हो जाएगा। थोड़ा फोटो फीचर बढ़ा दें। एक फोटो दस्तावेज़ हो सकता है। स्थानीय बोली की रचनाएं अच्छी लगती हैं।
- रवीश कुमार, दिल्ली

kamal ki site banayi hai...aisai manch ki sakht zaroorat thi...aur mitravar, aapkai saksham hathon mai hai isliye ummeedain bhi bandh rahi hain...jan,jangal, zameen kai sawal apsai badhiya kaun utha sakta hai... ...dhanonmukh patrakarita kai is yug mai janonmukh upkram ka parcham lahraya hai aapnai, aap samman ke bhagi hain, abhinandan kai patra hain.... ..pahad ke logon ki janvadi akankshaon ka gunjayman manch bane ye site,yahi kamna hai...badhai..
- प्रभात डबराल, दिल्ली

हिलवाणी एक सजग और सुरूचिपूर्ण कोशिश है.
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उत्तराखंड पर ढेरों साइट्स हैं, लेकिन सभी आधी-अधूरी। आपकी साइट इस गैप को भरती दिखती है। उम्मीद है आप पहाड़ की उन खबरों को भी तरजीह देंगे, जो आमतौर पर अखबारों से गायब दिखती हैं। साइट में ऑडियो फंक्शन जोरदार लगा।
- राकेश परमार, देहरादून

हिलवाणी एक बहुत ज्ञानवर्धक वेबसाइट है। यहाँ हमें उत्तराखंड से जुडी हुयी महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है। आपका प्रयास स्तुत्य है। बस एक सुझाव देना चाहता हूँ कि यहाँ आप कुछ आलेख गढ़वाली भाषा में भी डालें क्योंकि हमारी भाषा हमारी पहचान है। पहाड़ों कि संस्कृति बचानी है तो सबसे पहले हमारी भाषा को बचाना होगा। गुणानंद पथिक जी कि गढ़वाली कविता पढ़कर अच्छा लगा।
- साकेत बहुगुणा

good work. keep it up!
- अल्मा डबराल, दिल्ली

ये सराहनीय और सार्थक प्रयास है. गढ़वाल के रीति रिवाज व संस्कृति को और ज़्यादा प्रस्तुत करने की कोशिश हो तो बेहतर रहेगा.
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हिलवाणी को देखकर सुखद अहसास हुआ. अच्छा लगा कि ये काम शुरू हो पाया है.
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Hillwani is a very refreshing wbsite with all the ingredients that a good website must have. I came to know about it from one of my friends, and I'm happy to discover such a nice wesite. Keep up the good work.
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हिलवाणी को विस्तार से देखा. बहुत ख़ूबसूरत है. पहाड़ में हरियाली बहुत सुहाती है. दिन रात मारधाड़ या भाषण की ख़बरों से अलग इस तरह की चीज़ वाक़ई बहुत अच्छी लगी.
- मोहम्मद समी अहमद, मुज़फ़्फ़रपुर

साइट देखी. बढ़िया है. सुधार की गुंजाइश तो लगातार बनी रहती है. मुझे लगता है कि धीरे-दीरे कंटेंट बढ़ने पर और बेहतर होगी.
- प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता

वेबसाइट अच्छी है. थोड़ी कलरफ़ुल कर दीजिए. अभी सादी लग रही है. बाक़ी शुरुआत अच्छी है.
- आभा मोंढें, बॉन

बहुत अच्छी है ये कोशिश. अच्छी लगी. दो पंक्तियों में चलता स्क्रोलर थोड़ा डिस्ट्रैक्ट कर रहा है. एक से ही काम चल सकता है.
- तस्लीम ख़ान, नई दिल्ली

हिलवाणी हमेशा गूंजती रहे. शुभकामनाएं.
- नवीन जोशी, नैनीताल

बहुत ही अच्‍छा प्रयास है सार्थक बनाये रखे.
- विमलेश गुप्‍ता, शाहजहांपुर

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- सी के चंद्रमोहन, देहरादून

एक गंभीर प्रयास
- सचिन गौड़, बॉन

हिलवाणी के प्रयोग के लिए बधाई.
- ज़हूर आलम, नैनीताल

हिलवाणी के लिए बधाई और शुभकामनाएं
- वीरेन डंगवाल, बरेली

'हिलवाणी' बहुत अच्छी लगी - एक सुखद आश्चर्य जैसी. एक नज़र सभी पृष्ठ देख गया हूं. समाचार, कथा-कहानियां, कविताएं, साक्षात्कार, सभी कुछ तो है. बहुत सुंदर शुरुआत है.
- गुलशन मधुर, वाशिंगटन

ये वाकई बहुत अच्छी शुरुआत है. कम से कम मुझे अब ये पता चल पाया कि गुणानंद पथिक कौन थे. इसे लॉंच करने का शुक्रिया.
- दीपक डोभाल, वाशिंगटन

गिर्दा और विद्यासागर जी की आवाज़ सुनना ख़ास तौर से अच्छा लगा. मुझे विश्वास है हिलवाणी को पहाड़ की नई पुरानी पीढ़ियो का सक्रिय सहयोग और समर्थन मिलेगा.
- मंगलेश डबराल, दिल्ली

कंसेप्ट और कंटेंट बहुत अच्छा है. इन्हें बनाए रखें.
- रामदत्त त्रिपाठी, लखनऊ

वेबसाइट देखकर बहुत अच्छा लगा
- गोविंद सिंह, नई दिल्ली

वेबसाइट पसंद आई
- ललित मोहन जोशी, लंदन

अच्छी पहल, बधाई
- प्रोफ़ेसर गिरजेश पंत, देहरादून

बहुत बढ़िया शुरुआत. आला दर्जे की विविधता भरी सामग्री. बनाए रखें
- आनंद शर्मा, देहरादून

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