• उत्तराखंड में मॉनसून का कहर, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी जिलों में भारी नुकसान 
  • केदारनाथ घाटी तबाह, पचास के मरने की आशंका 
  • चार धाम यात्रा रुकी, जगह जगह 50 हज़ार से ज्यादा यात्री फंसे 
  • देहरादून में टूटे बारिश के 80 साल पुराने रिकॉर्ड 
  • आईटीबीपी और सेना के जवान राहत बचाव कार्य में जुटे 
  • केदारनाथ का मंदिर परिसर भी बर्बाद 
  • केंद्र ने सेना को लगाया, वायुसेना के हेलीकॉप्टर 
  • गढ़वाल के कई गांवों का संपर्क कटा, लोग मुश्किल में 
मुख्य मुद्दा
हुई भारी क्षतिः केंद्रीय दल

उत्तराखंड के आपदा प्रभावित इलाकों के दौरे पर आई केन्द्रीय टीम के लीडर संयुक्त सचिव (एफ) गृह मंत्रालय भारत सरकार जी.वी.वी.सारमा ने कहा कि उत्तराखण्ड में प्राकृतिक आपदा से काफी क्षति हुई है और वे केन्द्र स्तर पर राज्य पक्ष रखेंगे।

उन्होंने संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिये कि केन्द्र को भेजे जाने वाले विवरण को मानक के अनुसार तैयार करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा भेजे गये प्रस्ताव पर सी.आर.एफ. के मानक के अनुरूप धनराशि दी जायेगी और अतिरिक्त धनराशि के लिए एन.सी.सी.एफ. को प्रस्ताव भेजे जाने होंगे।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालीन बचाव योजनाओं के लिए केन्द्र सरकार द्वारा संचालित अन्य विकास योजनाओं से धनराशि प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने कहा कि क्षतिग्रस्त योजनाओं को मनरेगा से भी क्षतिपूर्ति की जा सकती है। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने केन्द्रीय दल को बताया कि दैवीय आपदा से राज्य को काफी क्षति हुई है। इसके साथ ही जनपदों में सम्पर्क मार्गों के टूटने से वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है। उन्होंने केन्द्रीय दल से सरकार द्वारा प्रस्तुत 21200 करोड़ रुपये की अनुमाति धनराशि को केन्द्र में प्रभावी पहल के साथ प्रस्तुत करने की अपेक्षा की।

बाद में केंद्रीय दल के साथ बैठक में मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्र की विषम परिस्थितियों को देखते हुए केन्द्रीय राहत निधि (सी.आर.एफ) के मानकों में बदलाव करने की आवश्यकता है। दैवीय आपदा से क्षतिग्रस्त सड़क मार्गो की मरम्मत के लिए अतिरिक्त धनराशि दी जाय। केन्द्रीय योजना आयोग और वित्त मंत्रालय से केन्द्रीय टीम यहां की परिस्थितियों को देखते हुए स्थायी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि दे।

मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय दल को बताया कि दैवीय आपदा से पर्वतीय क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है। राज्य सरकार को सिंचाई, बिजली, लोक निर्माण, शिक्षा, गन्ना विकास, उद्यान, पर्यटन, पेयजल, परिवहन विभाग तथा 200 गांवों में हुई क्षति एवं उनके पुनर्वास हेतु लगभग 21200.79 करोड़ रुपये धनराशि की आवश्यकता है। उन्होंने केन्द्रीय दल के सदस्यों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने बहुत कम समय में ही प्रदेश के सभी जनपदों में भ्रमण किया और स्वयं भी प्रभावित क्षेत्र में जाकर नुकसान का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हुई क्षति का आंकलन अभी प्रारंभिक है, जबकि वास्तविक आंकलन इससे भी कई अधिक है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड की परिस्थितियों को देखते हुए सी.आर.एफ. के वर्तमान मानक बहुत कम है, जिनमें वृद्धि की जाय। उन्होंने कहा कि हमने अपने संसाधनों से आपदा की प्रत्येक मद में धनराशि बढ़ायी है, जिसे भारत सरकार अपने मानकों में शामिल करते हुए और राष्ट्रीय आपदा आकस्मिक निधि से धनराशि राज्य को दी जाय। उन्होंने केन्द्रीय दल के सदस्यों से कहा कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्रीय योजना आयोग और वित्त मंत्रालय को भेजे गये प्रस्तावों पर शीघ्र स्वीकृति दिलाने के लिए केन्द्र स्तर पर प्रभावी पहल करें।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने अपने सीमित संसाधनों से दैवीय आपदा में राहत और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर किये, जिससे मानव हानि की संख्या कम हुई है। इस कार्य में एन.डी.आर.एफ., सेना, पुलिस और 06 हैलीकाप्टर की भी सेवा ली गई। उन्होंने कहा इस दैवीय आपदा से सड़क, बिजली, पानी, कृषि भूमि को भारी नुकसान हुआ है। लगभग 233 गांवों को दूसरी जगह शिफ्ट करना तात्कालिक आवश्यकता है, जिसके लिए केन्द्रीय सहयोग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केन्द्र द्वारा नदियों से चुगान करने पर रोक लगाई गई है, जिसके कारण नदियों में अधिक पानी आ गया और बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। उन्होंने कहा कि केन्द्रीय दल इस बात को भी केन्द्र स्तर पर रखे। 

मुख्यमंत्री ने दल के सदस्यों से कहा कि भ्रमण के दौरान उन्होंने स्वयं देखा होगा कि प्रदेश के गांव के गांव समाप्त हो गये है और जो गांव बचे है, उनका त्वरित विकास करना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र दो-दो अन्तर्राष्ट्रीय सीमाओं से घिरा हुआ है।

-हिलवाणी डेस्क

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